
अमेरिका का चुनिंदा बातों को भूलने का रोग:
रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका का भारत पर गुस्सा चरम विडंबना है – वही अमेरिका जो खुशी से रूसी यूरेनियम आयात करता है और चुनिंदा प्रतिबंध लगाता है। ट्रंप की 50% टैरिफ की धमकी एक बच्चे के रोने जैसी लगती है: “मेरे नापसंद पड़ोसी के साथ खेलना बंद करो, नहीं तो मैं तुम्हारे खिलौने तोड़ दूंगा!” वहीं भारत का जवाब एक धैर्यवान माता-पिता की तरह है जो नासमझ बच्चे से निपट रहा हो – मोदी का किसानों की रक्षा का दृढ़ रुख दिखाता है कि देश अमेरिकी स्वीकृति की जरूरत से आगे निकल चुका है।
पाकिस्तान की पहेली – ट्रंप की लाचारी का तमाशा
असली हास्य तो अमेरिका की पाकिस्तान की बेताब चाहत में है – वही देश जिसे खुद ट्रंप ने “आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला राष्ट्र” घोषित किया था! लेकिन अब वही ट्रंप पाकिस्तान के सामने ऐसे गिड़गिड़ा रहा है जैसे कोई भिखारी अपने पुराने दुश्मन से मदद मांग रहा हो। ओसामा को छुपाने वाले देश को बार-बार वॉशिंगटन बुलाना और “बेस्ट पार्टनर” कहना – यह वही आदमी है जो कभी कहता था “पाकिस्तान झूठे हैं और धोखेबाज हैं!” अब देखिए कैसे अपनी ही बातों को भूलकर उनके पीछे दौड़ रहा है जैसे कोई बेइज्जत प्रेमी अपनी धोखेबाज महबूबा के पीछे। जबकि भारत को – जो वास्तव में लोकतांत्रिक मूल्य साझा करता है – टैरिफ की धमकी मिलती है। यही है अमेरिकी विदेश नीति: अपने दोस्तों को सजा दो और दुश्मनों की चाटुकारी करो!