
राहुल गांधी, जो खुद को लोकतंत्र का सबसे बड़ा “संरक्षक” मानते हैं, ने इस बार एक और “भूकंप” लाने की कोशिश करी है — दावा किया कि एक शख्सियत, शकुन रानी, ने लोकतंत्र में बाय वन, गेट वन फ्री ऑफ़र ले लिया और दो बार वोट डाल दिया। कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी को यह ख़बर सुनते ही जैसे लगा कि किसी ने उन्हें व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी का नया फॉरवर्ड भेज दिया हो। उन्होंने तुरंत राहुल को नोटिस थमा दिया और याद दिलाया कि लोकतंत्र में कोई ऑफ़र नहीं, बल्कि सख्त नियम चलते हैं। लेकिन राहुल का राजनीतिक रडार तो हर वक्त “बीजेपी साज़िश” और “लोकतंत्र खतरे में है” वाली फ्रीक्वेंसी पर ट्यून रहता है, तो भला उन्हें ये मौका छोड़ना कैसे मंज़ूर होता?
पॉलिटिकल सीरियल का नया एपिसोड
राहुल बनाम सिस्टम, बस इस बार इलेक्शन कमीशन वाले स्क्रिप्ट में रोल देने के मूड में नहीं हैं।
वैसे मानना पड़ेगा, राहुल गांधी को छोटी-सी चाय की प्याली में सुनामी पैदा करने की अद्भुत कला आती है। उनका अंदाज़ कुछ ऐसा है जैसे वो हर बात को कोर्टरूम ड्रामा में बदल दें, जहाँ सबूत से ज़्यादा असरदार होते हैं उनके नाटकीय ठहराव और ऊँगली उठाने वाले पोज़।
शकुन रानी का मामला अभी क्लेरिकल गलती है या गांधीजी का “महान खुलासा” ये तो समय ही बताएगा, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये पूरा मामला शायद लोकतंत्र बचाने से ज़्यादा, अगली रैली के लिए डायलॉग प्रैक्टिस का हिस्सा है।
आखिर राहुल जी की राजनीतिक दुनिया में छींक भी अगर दो बार सुनाई दे जाए तो वो “राष्ट्रीय साज़िश” बन जाती है — और कुछ भी कहो, इतना ड्रामा तो किसी OTT वेब सीरीज़ में भी नहीं मिलता।